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Hindi-Urdu-Kavita-Shyari-Ghazal

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ये रात की स्याही किसने डाली,

मेरे दिल के उजाले में

ये आग किसने डाली

मेरे मौम से ख्वाबों में

ये आवाज़ किसने डाली,

मेरी खामोशियों में

मेरे सुकून में जलजला लाने वाले,

अब तो नकाब उठा दे

इरादे अपने बता दे,

या तो साथ मेरे होले,

या अपना पता बता दे

निरंतर जज्बातों से खेलने वाले,

अब तो दिल कर दे मेरे हवाले

04-09-2010

मुलाक़ात तो हुई,मगर बात न हुई

बगल में बैठे थे,पर अपने में खोये थे

शायद झिझक रहे थे,या सोच रहे थे

कैसे शुरू करें?

दिखाने को नज़र सामने थी,

पर जान कहीं और अटकी थी

बातें बहुत कहने को थी,

बरसों से जो भरी थी

इसी उहापोह में,वक़्त निकल गया

जाने का समय हो गया,

वो चले गये, सवाल फिर छोड़ गये

मन की बात मन में ही रह गयी

जो कहनी थी,अनकही रह गयी

मुलाक़ात तो हुई,मगर बात न हुई

04-09-2010

वे आये या ना आये,

अब फर्क नहीं पड़ता

वो बुलायें या ना बुलायें,

अब फर्क नहीं पड़ता

जख्म इतने खाये हैं,

अब फर्क नहीं पड़ता

इतना दुतकारे गये हैं,

अब फर्क नहीं पड़ता

इतना सताए गये हैं,

अब फर्क नहीं पड़ता

इतना तडपाये गये हैं,

अब फर्क नहीं पड़ता

अब गम की चादर ओढ़ ली,

खिजा से दोस्ती करली,

कुर्बान हसरत अपनी कर दी

ना ज़िंदा हूँ ना मुर्दा हूँ,

वक़्त कट जाये,

इस इंतज़ार मैं बैठा हूँ

बस दुआ खुदा से करता हूँ,

निरंतर इबादत करता हूँ

वे आये या ना आये,

अब फर्क नहीं पड़ता

03-09-2010

प्यार कितना भी करो ,

जाहिर ना करो

आग दिल मैं लगी हो,

जाहिर ना करो

दर्द दिल में होता है,

जाहिर ना करो

दिल कितना भी झूमे,

जाहिर ना करो

उनके आहट से कुछ होता है,

ज़ाहिर ना करो

देख के उनको ख्याल आएँ,

जाहिर ना करो

ख्याल से उनके,खुमार आये,

जाहिर ना करो

वो ख्वाबों मैं आएँ ना आएँ,

जाहिर ना करो

वो तुम को सताएँ,

जाहिर ना करो

नज़र किसी की ना लगे,

मैं जुदाई से डरता हूँ,

दूर से ही सही,

प्यार दिल से करता हूँ,

वोह खुश रहें,महफूज़ रहें,

इतना ही काफी है

दूरी कितनी भी खले,

ज़ाहिर ना करो

निरंतर प्यार करो,

ज़ाहिर ना करो

03-09-2010

मेरी इल्तजा तू सुन ले,

मेरा प्यार कबूल कर ले

मैंने तुझको चाहा है,

मन ही मन तुमने माना है

ये बात जुदा है ,

तुम हाँ नहीं भरोगी,

बात अपनी रखोगी

मैं जानता हूँ ,

तुम मुझे चाहती हो,

पर दुनिया से घबराती हो

कहना चाहते हुए भी ,

कह नहीं पाती हो

प्यार कब तक छुपाओगी,

कब तक हमें सताओगी

सच से पर्दा हटाओ,

अब उसे सामने लाओ

आगे बढ़ प्यार करो,

निरंतर इकरार करो,

सच को स्वीकार करो

03-09-2010

मेरे ख्यालों को उड़ान भरने दो,

उन्हें खुले आकाश में उड़ने दो

जो बीत गया उसे जाने दो,

जो किया नहीं उसे करने दो

ख्वाबों को हकीकत बनाना है,

प्यार मोहब्बत से जीना है

इक ऐसी दुनिया में जाना है,

जिसमें रहने वालों ने,

सिर्फ मोहब्बत को जाना है

नफरत करने वालों को,

कभी नहीं पहचाना है

निरंतर प्यार करते हैं,

सिर्फ प्यार की उड़ान भरते हैं

मेरे ख्यालों को उड़ान भरने दो,

उन्हें खुले आकाश में उड़ने दो

03-09-2010

मौत का इंतज़ार है,सफ़र जिन्दगी का,

कब्रिस्तान है मुकाम जिन्दगी का

तब क्यों नफरत में जीते हैं?

ये कौन सा हिसाब जिन्दगी का

प्यार ना हो जिस जिंदगी में,

क्या रखा है फिर उस जिन्दगी में

निरंतर जीते हैं जो दरिंदगी में,

दोजख भी नसीब ना होगी

उन्हें फिर किसी भी जिन्दगी में

05-09-2010

ये पत्थरों का शहर है,

अश्कों का क्या काम

जहाँ पत्थर के बुत रहते हों,

हंसी का क्या काम

जहाँ दिल ही नहीं,

दर्द का क्या काम

रंजो गम त्योंहार हो जहाँ,

खुशियों का क्या काम

जहाँ निरंतर हाथ मैं खंजर,

गुलदस्तों का क्या काम

नफरत की बस्ती मैं,

मोहब्बत का क्या काम

ये पत्थरों का शहर है....

06-09-2010

सोच में डूबा था,ख्यालों में खोया था,

तुम को अब भी खोज रहा था

क्या नहीं किया,तुमको पाने के लिए,

खुद को भुला दिया,मंजिल पाने के लिए

हश्र क्या यही होना था मेरी कोशिशों का?

झूठ ही सही, मुस्करा ही देते,

मेरी कोशिशों का जवाब तो देते

मुझे गम नहीं है तेरी चाहत मैं,

जिन्दगी गवाने का,

आखरी मौक़ा यही बचा है,

तुम्हें लुभाने का

जान गंवाकर ही सही,तुमको पाऊँगा,

निरंतर चाहा था,हमेशा चाहूंगा

06-09-2010